रोगोपचार मे मालिश का महत्व
मालिश करने की प्रथा बहुत प्राचीन है। मिश्र, चीन, यूनान, रोम आदि प्राचीन देशों में स्वास्थ्य वृद्धि और पीड़ा निवारण के लिये मालिश के उपयोग का उल्लेख मिलता है। इतिहास बतलाता है कि रोम का प्रसिद्ध सम्राट जुलियस सीजर, जो अब से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व हुआ था, शरीर के दर्द को मिटाने के लिये नित्य मालिश कराता था। भारतवर्ष की प्राचीन कथाओं तथा अन्य प्रसिद्ध ग्रन्थों में मालिश का वर्णन पाया जाता है। मुसलमानी शासन काल में बड़े लोग विलासिता के भाव से प्रायः मालिश कराया करते थे और उस समय दिल्ली, लखनऊ, आगरा जैसी राजधानियों में निपुण मालिश करने वालों का एक समुदाय ही बन गया था। अब आधुनिक युग में अन्य विषयों की भाँति चिकित्सा−विज्ञान के ज्ञाताओं ने मालिश के सम्बन्ध में भी खोजबीन की है और उसके सम्बन्ध में ऐसे अनेक रोग निवारक तथ्यों को खोज निकाला है जिन पर पहले जमाने में कदाचित ही ध्यान दिया जाता था। अब मालिश का उपयोग विशेषतः शरीर के रक्त −संचरण को ठीक करने की दृष्टि से किया जाता है। साथ ही उसके द्वारा शरीर के किसी खास अंग या भाग में एकत्रित विजातीय द्रव्य फैलकर हट जाता है और क्रमशः बाहर निक...